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BIRTHDAY SPECIAL: फ़िल्मी माँ का ज़िक्र आता है, तो नाम निरुपा राय का ही आता है

“मेरे पास माँ है”। इस फ़िल्मी डायलॉग की माँ निरूपा राय की 85वीं जयंती 4 जनवरी को थी। उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में 4 जनवरी सन् 1931 को हुआ था। उनके फिल्मों में आने के पीछे भी एक कहानी है।

  • पुनीत बिसारिया

उनके पति फिल्मों में हीरो बनना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने एक निर्देशक से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि आपकी सूरत फिल्मों के अनुकूल नहीं है लेकिन यदि वे चाहें तो उनकी पत्नी निरूपा राय को हीरोइन का रोल दे सकते हैं।

इस प्रकार सन् 1946 में गुजरती फ़िल्म गुणसुंदरी से उन्होंने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरूआत की। उनकी पहली हिंदी फ़िल्म सन् 1949 में आयी हमारी मंजिल थी। इसके बाद कई फिल्मों में उन्होंने पार्वती, द्रौपदी आदि के पौराणिक चरित्र किए।

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सन 1955 में मात्र 24 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुनीमजी फ़िल्म में अपने से काफी बड़े देवानंद की माँ की भूमिका निभाई। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया।

अमिताभ बच्चन की अधिकांश सुपरहिट फिल्मों में उन्होंने माँ की भूमिका निभाकर माँ की भारतीय संस्कृति की ममतालु छवि को सेल्युलाइड पर उकेरा। इस महान अभिनेत्री ने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।

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इनमें दो बीघा जमीन, शहनाई, दीवार, लाल बादशाह, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथनी, सुहाग, खून पसीना, बेताब, छाया आदि प्रमुख हैं।

इस महान अभिनेत्री का 13 अक्टूबर 2004 को निधन हो गया। जब भी फ़िल्मी माँ का ज़िक्र आएगा, तब तब हमारी जुबान पर एक ही नाम आएगा जो है निरूपा राय जी का। इस बेहतरीन अभिनेत्री को कृतज्ञ श्रद्धांजलि।

(पुनीत बिसारिया सिनेमा की गहरी समझ रखते हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं।)


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