Latest News

अपनी शर्तों पर जीने के जोखिम

हमारे देश में लंबे समय से पितृसत्तात्मक व्यवस्था है, जिसमें महिलाओं के जीवन के हर पहलू पर पुरुष अपना अधिकार समझता है। बिंदु डालमिया के उपन्यास ‘द डायरी ऑफ ए लुटियन्स प्रिंसेसट में इसी पितृसत्तात्मक संरचना से पूरे आत्मविश्वास के साथ जूझती एक स्वतंत्र एवं आत्मनिर्भर स्त्री के जीवन का चित्रण किया गया है।

यह अक्षरा नामक एक मध्यवर्गीय लड़की की कहानी है, जिसके पिता नौकरशाह हैं, जो लड़कियों की आजादी के प्रति काफी सख्त हैं। वह मानते हैं कि लड़कियों को पुरुषों के साथ नहीं मिलना-जुलना चाहिए, क्योंकि सभी पुरुष दुष्ट होते हैं। वह अपनी बेटी की शादी अच्छे, गुणी पंजाबी लड़के के साथ करना चाहते हैं, जो न तो सिगरेट पीता हो और न शराब।

अगर कोई लड़का इन मानदंडों पर खरा नहीं उतरता है, तो लड़की को लक्ष्मण रेखा के उल्लंघन का दुस्साहस नहीं करना चाहिए। लेकिन माता-पिता की मर्जी के खिलाफ अक्षरा ने अपने प्रेमी अर्नब के साथ विवाह करने के लिए अट्ठारह वर्ष की उम्र होने तक का भी इंतजार नहीं किया।

हालांकि शादी के बाद शीघ्र ही उसे पता चल गया कि जवानी के जोश में उठाया गया कदम हमेशा सही नहीं होता। फिर भी वह हार नहीं मानती है और अपने अस्तित्व व निजी पहचान की तलाश में सत्ता के केंद्र दिल्ली चली आती है और तीस की उम्र तक आते-आते वह सफल उद्यमियों में से एक बन जाती है।

बिंदु डालमिया ने बड़ी ही खूबसूरती से मुख्य कथा के साथ तत्कालीन जीवन-समाज के हर पहलू का विश्लेषण किया है और आज के संदर्भ में उसकी व्याख्या भी की है, जो एक तरह से समाजशास्त्रीय अध्ययन की तरह लगता है। अक्षरा के जीवन में दूसरा महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है, जब वह एक बड़े व्यवसायी घराने के सूर्यप्रकाश से दूसरी शादी करती है, लेकिन इस विवाह में भी उसके हिस्से में दुख ही आता है।

बिंदु डालमिया ने वास्तव में इस उपन्यास में यह दर्शाया है कि हमारे भारतीय समाज में विवाह में समस्या सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर स्त्रियों को ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर स्त्रियों को भी झेलनी पड़ती है। इस पुस्तक में एक जगह एक वाक्य आया है कि दिल्ली में लोगों के जेहन में हमेशा पावर, पावर और पावर का नशा हावी रहता है।

पुस्तक के शुरू में जहां 1967 के कोलकाता के माहौल, नक्सलवादी आंदोलन, क्लब लाइफ आदि का वर्णन है, तो आगे आर्थिक रूप से बदलते भारत से अति समृद्ध लोगों की महात्वाकांक्षा, उपलब्धियों और कड़वाहट भरे रिश्तों का चित्रण है। अक्सर कहा जाता है कि जीवन विसंगतियों और विरोधाभासों की कथा है, तो इस पुस्तक में इसे बेहद खूबसूरती से रेखांकित किया गया है।

कुल मिलाकर, यह पुस्तक बेहद रोचक, दिलचस्प और विचारोत्तेजक है, जो बताती है कि अपनी शर्तों पर जीवन जीने की कामना करने वाली स्त्रियों को हमारे भारतीय समाज में तमाम तरह के जोखिम उठाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

पुस्तक-द डायरी ऑफ ए लुटियन्स प्रिंसेस
लेखक-बिंदु डालमिया
प्रकाशक-रूपा पब्लिकेशन इंडिया प्रा. लि.
मूल्य-500 रुपये

We will be happy to hear your thoughts

Leave a reply