Latest News

Film Review: एक बेगम की अनसुनी दास्तां

‘बेगम जान’ आजादी के दौर की एक ऐसी कहानी है, जो शायद आपने सुनी हो। यह एक बेगम की अनसुनी दास्तां है। ये बेगम अपने कोठे की मालकिन है और रानी की तरह रहती है। अभिनेत्री विद्या बालन ने बेगम की लाजवाब भूमिका अदा की है। वो एक बिंदास जिद्दी महिला के किरदार में खूब जमी हैं।

बेगम जान 1947 में देश विभाजन के कई मार्मिक पल हमारे सामने लाती है। इन्हीं में एक भारत-पाकिस्तान को बांटने वाली रेडक्लिफ रेखा के खींचे जाने का मामला है। फिल्म बताती है कि यह रेडक्लिफ रेखा बेगम जान के कोठे के बीच से गुजरती है।

यही नहीं, श्रीमान रेडक्लिफ ने कोठे की जगह पर एक सैनिक चौकी बनाने की योजना भी नक्शे में दर्ज कर रखी है। अब भारत-पाकिस्तान के अधिकारियों की कोशिश है कि किसी तरह बेगम जान से उसकी यह चारदीवारी छीन ली जाए।

परंतु बेगम जान और उसके लिए काम करने वाली लड़कियों को यह मंजूर नहीं। यह कोठा ही उनका घर है, देश है, देह है। यहां इन्हीं का कानून चलता है। सवाल यह कि क्या अधिकारी बेगम जान से कोठा खाली करा सकेंगे?

बेगम जान के वे दृश्य और संवाद चौंकाते हैं जो नग्न सचाइयों को छुपाने वाले परदों को तार-तार कर देते हैं। इनमें स्त्री पुरुष संबंध, धर्म-जाति की ऊंच-नीच, लोगों को हिंदू-मुसलमान में बांट कर फैलाई जाने वाली नफरत जैसे विषय शामिल हैं।

बेगम जान बातों की रौ में बहती हुई कई बार क्रूर ढंग से इनका पोस्टमार्टम करती हैं। विद्या बालन अपने किरदार में डूबी हुई हैं। खास तौर पर दूसरे भाग में वह छा जाती हैं। गौहर खान और पल्लवी शारदा के हिस्से भी कुछ अच्छे दृश्य हैं। आशीष विद्यार्थी, रजित कपूर और विवेक मुश्रान अपनी भूमिकाओं को साधे रहते हैं। चंकी पांडे अपने लुक से चौंकाते हैं।

श्रीजीत मुखर्जी ने राजकहिनी की मूलकथा, उसके फिल्मांकन और संवादों से ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की। परंतु एक बड़ा बदलाव किया। राजकहिनी दुनिया के प्रत्येक रिफ्यूजी को समर्पित फिल्म थी। उसका दायरा वैश्विक था।

जबकि हिंदी में कहानी को 2016 की दिल्ली में रेप की कोशिश की एक घटना से शुरू किया गया है। इससे न केवल फिल्म की टोन बदल गई बल्कि बांग्ला और हिंदी फिल्मों के संदेश में जमीन-आसमान का अंतर आ गया।

दरअसल महेश भट्ट ने अपनी स्त्री-पुरुष और हिंदू-मुस्लिम फिलॉसफी को फिल्म में पिरो दिया। इस तरह श्रीजीत पर हिंदी संस्करण में निर्माता का हस्तक्षेप दिखता है। इसे नजरअंदाज करें तो हिंदी के दर्शकों के लिए बेगम जान एक अलग अनुभव साबित हो सकती है।

बेगम जान राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी की बांग्ला फिल्म राजकहिनी का हिंदी रीमेक है। यह आजादी के दौर की ऐसी कहानी है जो आपने पहले नहीं सुनी होगी। बीते कुछ वर्षों में लगातार फ्लॉप होने वाले भट्ट कैंप के लिए भी यह फिल्म सफलता की नई उम्मीद है।

निर्माताः मुकेश भट्ट-विशेष भट्ट
निर्देशकः श्रीजीत मुखर्जी
सितारेः विद्या बालन, गौहर खान, पल्लवी शारदा, आशीष विद्यार्थी, रजित कपूर, नसीरूद्दीन शाह
रेटिंग- 3



Most Read News-

प्रियंका चोपड़ा ने कही ऐसी बात जिसे सुनकर हैरान हो जाएंगे आप

अमिताभ-रेखा और दिलीप कुमार-मधुबाला क्यों हुए अलग, जानें रील जोड़ियों का रियल लव कनेक्शन

जग्गा जासूस की रिलीज को लेकर बुरे फंसे रणबीर कपूर, जानिए क्यों?

खुद के बारे में सनी लियोनी ने दिया ऐसा बयान, जानकर हैरान हो जाएंगे आप

मनोरंजन जगत की बेहतरीन और ताजा खबरों के लिए क्लिक करें। हमारे फेसबुक पेज से जुड़े रहिए

We will be happy to hear your thoughts

Leave a reply